Thursday, 30 July 2015

नहाने के पानी का ये प्राचीन उपाय करने से दूर हो सकती है दरिद्रता


नहाने से स्वास्थ्य लाभ और पवित्रता मिलती है। सभी प्रकार के पूजन कर्म आदि नहाने के बाद ही किए जाते हैं, इस कारण स्नान का काफी अधिक महत्व है। पुराने समय में सभी ऋषि-मुनि नदी में नहाते समय सूर्य को जल अर्पित करते थे और मंत्रों का जप करते थे। इस प्रकार के उपायों से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं।

Nahane ke pani ka ye upay dur kar sakta hai daridrta

ज्योतिष में धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जो अलग-अलग समय पर किए जाते हैं। नहाते समय करने के लिए एक उपाय बताया गया है। इस उपाय को सही विधि से हर रोज किया जाए तो निकट भविष्य में सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं।

जानिए उपाय की विधि...

प्रतिदिन नहाने से पहले बाल्टी में पानी भरें और इसके बाद अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) से पानी पर त्रिभुज का चिह्न बनाएं।

त्रिभुज बनाने के बाद एक अक्षर का बीज मंत्र ‘ह्रीं’ उसी चिह्न के बीच वाले स्थान पर लिखें। साथ ही, अपने इष्ट देवी-देवता से परेशानियों दूर करने की प्रार्थना करें।

हर रोज नहाने से पहले यह उपाय करें। इस उपाय के संबंध में किसी प्रकार की शंका या संदेह नहीं करना चाहिए। आस्था और विश्वास के साथ उपाय करेंगे तो सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही, इस उपाय की चर्चा भी किसी से नहीं करना चाहिए। अन्यथा उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाता है।

नहाते समय करें मंत्रों का जप
शास्त्रों में दिन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। नहाते समय भी हमें मंत्र जप करना चाहिए। स्नान करते समय किसी मंत्र का पाठ किया जा सकता है या कीर्तन या भजन या भगवान का नाम लिया जा सकता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

नहाते समय इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है...
मंत्र: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

नदी में नहाते समय पानी पर ऊँ लिखें
यदि कोई व्यक्ति किसी नदी में स्नान करता है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर पानी में तुरंत डुबकी मार लेना चाहिए। ऐसा करने से नदी स्नान का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है। इस उपाय से ग्रह दोष भी शांत होते हैं। यदि आपके ऊपर किसी की बुरी नजर है तो वह भी उतर जाती है।

Thursday, 2 July 2015

..तो कुंडली में मंगल के ऐसे दोष नही रहेंगे

Angraka graha.JPG

मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों का सेनापति माना गया है। इसी वजह से इसका प्रभाव भी काफी अधिक होता है। मंगल किसी भी व्यक्ति का स्वभाव पूरी तरह प्रभावित करता है। अगर यह किसी कुंडली में शुभ होता है तो वह व्यक्ति बहुत अपने जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करता है लेकिन मंगल अशुभ हो या नीच राशि में होता है तो उसका जीवन परेशानियों से भरा रहता है।


कुंडली के किस भाव में मंगल कितना अशुभ-


-कुंडली में मंगल प्रथम भाव में हो तो वह व्यक्ति साहसी, मूढ़, अल्पायु, अभिमानी, शूर, सुंदररूप वाला और चंचल होता है।

- किसी भी व्यक्ति की कुंडली में मंगल चौथे घर में हो तो वह वस्त्र और भाई-बंधु से

हीन, वाहन रहित और दुखी होता है।

-जन्मकुंडली में सप्तम भाव में मंगल हो तो वह व्यक्ति रोगी, गलत कार्य करने वाला,

दुखी, पापी, निर्धन और पतले शरीर वाला होता है।

- मंगल अष्टम में होता है गरीब, कम उम्र का और दुखी रहने वाला होता है

- कुंडली के बाहरवें भाव में मंगल हो तो वह व्यक्ति आंखों का रोगी और चुगलखोर होता है। ऐसा व्यक्ति के जीवन में जेल भोगने के भी योग बन सकते हैं।


मंगल दोष मिटाने के उपाय-

- हर मंगलवार को शहद खाएं।

- 12 मंगलवार तक गुड़ पानी में बहाएं।

- हर मंगलवार को हनुमान मंन्दिर में लड्डू का प्रसाद चढ़ाए और बांटे।

- कुत्तों को मिठी रोटीयां खिलाएं।

- बताशे पानी में बहाएं।

- 7 मंगलवार तक दूध में चावल धोकर पानी में बहाएं।

- बंदरों को चने खिलाएं।

Monday, 29 June 2015

मीन लग्न और समस्या निवारक उपाय


जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके.
यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं. 

आर्थिक समस्या निवारण हेतु:-

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो अथवा पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो, तो इसके निवारणार्थ किसी भी द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी तिथि से आरंभ कर नियमित रूप से सवा माह लगातार भगवान शिव की प्रतिमा के सम्मुख ग्यारह जपा कुसुम( अडहुल/ Chinese Rose) के पुष्प चढाकर श्री रूद्राष्टाध्यायी का पाठ करें. 
इसके अतिरिक्त घर अथवा कार्यस्थल की उतर-पश्चिम दिशा में सफेद पुष्पों के पौधे लगायें एवं संभव हो तो संयुक्त परिवार में ही निवास करें.
यदि जन्मकुंडली में बृहस्पति नीच अथवा कुंभ राशि में न हो तो सवा 5 रत्ती वजन का पुखराज रत्न भी स्वर्ण धातु में धारण कर सकते है.
केवलमात्र सिर्फ इस एक उपाय के करने से ही आप देखेंगें कि जहाँ एक ओर आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है.

भाग्योन्नति हेतु:-

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए आप ये एक कार्य कीजिए, कि सर्वप्रथम स्वर्णमंडित गौरीशंकर रूद्राक्ष अथवा स्वर्ण की बनी शंखाकृति गले में धारण करें.
तत्पश्चात नित्य प्रात: स्नानादि पश्चात किसी पात्र में जल भरकर अपने सम्मुख रखें और निम्न मन्त्रोच्चारण पश्चात उस जल को किसी पीपल के वृक्ष को अर्पित कर दें . 

ॐ लां इन्द्राय देवाधिपतये नमः ।
ॐ रां अग्नये तेजाधिपतये नमः।
ॐ यां यमाय प्रेताधिपतये नमः ।
ॐ क्षां निऋत्ये रक्षोधिपतये नमः ।
ॐ वां वरुणाय जलाधिपतये नमः ।
ॐ यां वायवे प्राणाधिपतये नमः ।
ॐ सां सोमाय ताराधिपतये नमः ।
ॐ हां ईशानाय गणाधिपतये नमः ।
ॐ आं ब्रह्मणे प्रजाधिपतये नमः ।
ॐ ह्रीं अनन्ताय नागाधिपतये नमः


केवलमात्र इसी उपाय के करने से आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध मिटकर जीवन में एक नई उर्जा, शान्ति एवं स्थायी सुख-समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.


सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए कम से कम 12 रविवार लगातार उपवास रखें और सूर्योदय से मध्यांह की अवधि के बीच में किसी निर्धन व्यक्ति को सवा किलो गेहूँ का दलिया दान करें. 
इसके साथ ही शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को श्वेत वस्त्र में सफेद आक के 5 फूल, दो त्रिमुखी रूद्राक्ष, चावल और पारद शिवलिंग बाँधकर घर के पूजास्थल में स्थापित करें एवं नित्य प्रात: श्री सूर्य गायत्री " ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात " का जाप किया करें.
यदि आप विधिपूर्वक उपरोक्त उपाय को सम्पन्न कर सकें तो समझिए कि आप सम्पत्ति,वाहन अथवा सामाजिक व्यवहार एवं य़श-मान सम्बन्धी बहुत सी समस्यायों से बेहद आसानी से मुक्ति पा सकेंगें. 


सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु:-

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं दैनिक कार्यों में व्यवधान अनुभव कर रहे हों, तो आपको प्रतिदिन सुबह अपने इष्टदेव के सम्मुख गाय के शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाते रहना चाहिए.
यदि आपकी जन्मकुंडली में चन्द्रमा नीच राशि में स्थित न हो तो आप सवा 7 रत्ती का चन्द्रकान्त मणि (Moon Stone ) दाहिने हाथ की अनामिका (Ring Finger) अंगुली में धारण कर सकते हैं अन्यथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन एक द्विमुखी रूद्राक्ष गले में धारंण करें.
इसके साथ ही नियमपूर्वक प्रत्येक रविवार भगवान भुवनभास्कर का स्मरण कर थोडा कच्चा दूध और गुड किसी धार्मिक स्थल अथवा किसी निर्धन व्यक्ति को दान करते रहें, तो इन उपायों से जहाँ एक ओर आपका जीवन सुगम होगा, वहीं आपको जीवन में अनायास उत्पन हो रही कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज रूप में ही मुक्ति मिलने लगेगी.


पारिवारिक कलह मुक्ति एवं दाम्पत्य सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आपको नियमित रूप से रात को सोने से पूर्व बिस्तर पर बैठकर ही 12 बार " नमोस्तु पुष्पबाणाय जगदानन्द कारिणे ! मन्मथाय जगन्नेत्र रतिप्रीतिप्रदायिने !! " मन्त्र का जाप करते रहना चाहिए.
न्यूनतम 40 दिन लगातार केसर मिश्रित नारियल जल द्वारा में भगवान शिव का अभिषेक करें.

इसके अतिरिक्त यदाकदा 9 वर्ष से कम उम्र की कन्यायों को मिष्ठान्न खिलाते रहें तो समझिए कि अब आपके दाम्पत्य जीवन में परस्पर प्रेम, माधुर्य एवं शान्ती का समावेश होने लगा है. 
* एक बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें कि अपना श्यनकक्ष ( Bedroom ) कभी भूलकर भी घर के वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा में न बनायें अन्यथा दम्पत्ति में आपसी सामंजस्य का अभाव सदैव बना ही रहेगा. 

भय, मानसिक तनाव एवं ऋण से मुक्ति हेतु:-

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं या फिर कहीं ऋण के बोझ से पीडित हैं तो उसके लिए सर्वप्रथम कम से कम 8 शुक्रवार लगातार किसी धार्मिक स्थल पर सवा 2 मीटर जामुनी रंग का कपडा और 250 ग्राम पंचमेवा चढायें. साथ ही वर्ष में कम से कम 2 बार अर्थात हर छ: माह की अवधि पश्चात किसी भिखारी को अपना पुराना वस्त्र अवश्य दान किया करें. 
अपने भवन की दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग के पेंट द्वारा "कलश" का एक चित्र बनवायें अथवा इस दिशा में छत पर कलश की आकृति युक्त एक लाल रंग का तिकोणा ध्वज लगायें.
प्रत्येक मंगलवार भगवान गणपति जी के सम्मुख तिलों के तेल का दीपक प्रज्जवल्लित कर उन्हे मीठे पान का भोग लगाया करें. 

इन साधारण से उपायों से एक ओर जहाँ आप मानसिक तनाव/भय/दबाव/चिन्ता इत्यादि से मुक्त हो पायेंगें, वहीं आपकी आय में वृद्धि के साथ ही ऋण से मुक्त होने की परिस्थितियाँ भी निर्मित होने लगेंगीं.

कुंभ लग्न और समस्या निवारक उपाय


जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके.
यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं. 

आर्थिक समस्या निवारण हेतु:-

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो अथवा पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो, तो इसके लिए सर्वप्रथम अपने घर एवं कार्यस्थल दोनो जगह पर चाँदी के किसी पात्र में शहद भरकर स्थापित करें.
किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि के दिन श्री विष्णु मन्दिर में श्वेत वस्त्र का बना एक ध्वज अर्पित करें.
शनिवार के दिन चाँदी और स्वर्ण मिश्रित धातु का छल्ला मध्यमा अंगुली में तथा स्वर्ण मंडित तेरहमुखी रूद्राक्ष गले में धारण करें.
नियमपूर्वक प्रत्येक बुधवार एक नारियल और 11 छुआरे देवी मन्दिर में अर्पित किया करें. 
इसके अतिरिक्त यदि आपको व्ययाधिक्य के कारण किन्ही आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड रहा हो, तो उसकी निवृति के लिए टोपी/पगडी/वस्त्र आदि से सिर को ढाँपकर गुरूवार के दिन किसी पीपल के वृक्ष की 9 परिक्रमा अवश्य किया कीजिए. 
केवलमात्र सिर्फ इन चन्द उपायों के करने से ही आप देखेंगें कि जहाँ एक ओर आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है.

भाग्योन्नति हेतु:-

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए आपको केवलमात्र सिर्फ एक उपाय करना है कि किसी भी माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन परिवार के समस्त सदस्यों को साथ लेकर आप गंगास्नान करें.
तत्पश्चात जीवन पर्यन्त प्रत्येक अमावस्या के दिन किसी सुयोग्य विद्वान ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन अवश्य कराते रहें. 
केवलमात्र इसी उपाय के करने से आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध मिटकर जीवन में एक नई उर्जा, शान्ति एवं स्थायी सुख-समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.

सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए आपको 16 सोमवार लगातार सवा 2 किलो कच्चा दूध और हरा हकीक रत्न किसी नदी/ नहर इत्यादि बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए.
इसके साथ ही शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्वेत वस्त्र में दो छ:मुखी रूद्राक्ष और चाँदी का छोटा सा त्रिशूल बाँधकर घर के पूजास्थल में स्थापित करें एवं नित्य प्रात: श्री शिव चालीसा का पाठ अवश्य किया करें.
यदि आप विधिपूर्वक उपरोक्त उपाय को सम्पन्न कर सकें तो समझिए कि आप सम्पत्ति,वाहन अथवा सामाजिक व्यवहार एवं य़श-मान सम्बन्धी समस्त समस्यायों से बेहद आसानी से मुक्ति पा सकेंगें. 

सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु:-

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं दैनिक कार्यों में व्यवधान अनुभव कर रहे हों, तो आपको प्रतिदिन सुबह अपने इष्टदेव के सम्मुख तिलों के तेल का दीपक अवश्य जलाते रहना चाहिए.
यदि आपकी जन्मकुंडली में शुक्र नीच राशि में स्थित न हो तो आप सवा 7 रत्ती का अमेरिकन डायमंड दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर सकते हैं अन्यथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन एक नवमुखी रूद्राक्ष गले में धारंण करें.
प्रत्येक सक्रान्ति को परिवार के समस्त सदस्यों का हाथ लगवाकर सवा किलो कच्ची खिचडी किसी भिखारी को दान करते रहें, तो इन उपायों से जहाँ एक ओर आपका जीवन सुगम होगा, वहीं आपको जीवन में अनायास उत्पन हो रही कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज रूप में ही मुक्ति मिलने लगेगी.


पारिवारिक कलह मुक्ति एवं दाम्पत्य सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आपको नियमित रूप से श्री सूर्य गायत्री का पाठ करना चाहिए.
कम से कम 12 रविवार लगातार भगवान शिव का अभिषेक कर शिवलिंग पर गौ घृत मिश्रित लाल रक्त चन्दन का लेप लगायें.
धर्मपत्नि को वर्ष में कम से कम दो बार कुछ दिनो के लिए अपने पीहर (मायके) भेजें.
पति 24 या 32 ग्राम वजन का चाँदी का कडा तथा पत्नि लाख की चूडी अवश्य धारण किये रहे तो समझिए आपके दाम्पत्य जीवन में परस्पर प्रेम, माधुर्य एवं शान्ती का समावेश होने लगा है. 
* एक बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें कि अपना श्यनकक्ष ( Bedroom) कभी भूलकर भी घर के नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम ( South-West) दिशा में न बनायें अन्यथा आपसी तनाव की सदैव बनी ही रहेगी. 


भय, मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु:-

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए सर्वप्रथम किसी भिखारी को शनिवार अथवा बुधवार के दिन नीला वस्त्र और चमडे की जूती/चप्पल दान करें.
अपने भवन की उत्तर दिशा में सफेद हंस की एक पत्थर की प्रतिमा स्थापित करें.
सोते समय सिरहाने एक चुटकी भर सुहागा लाल कागज की पुडिया में बाँधकर रखे रहें.
इन साधारण से उपायों से एक ओर जहाँ आपको मानसिक तनाव/भय/दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलने लगेगी, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों की भिन्न-भिन्न विचारधाराओं से मन में उपजने वाली उदासीनता एवं वैमनस्य का भाव भी जागृत नहीं हो पायेगा.

मकर लग्न और समस्या निवारक उपाय


                                   जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके. यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं.

आर्थिक समस्या निवारण हेतु:-

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो, पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो अथवा अत्यधिक परिश्रम के उपरान्त भी व्यवसायिक कार्यों में सफलता की प्राप्ति न हो पा रही हो, तो इसके लिए आपको सर्वप्रथम शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में सवा 7 रत्ती वजन का ओपल रत्न तथा गले में एक चौदहमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए.
          
          घर/कार्यस्थल की पश्चिम दिशा में, गमले में सफेद फूलों वाले पौधे लगाकर रखें. लगातार 21 मंगलवार सिन्दूर, जायफल, शुद्ध घी, लाल रंग के पुष्प, बून्दी के 2 लड्डू, पान का एक पत्ता और 5 छुआरे संध्या समय श्री हनुमान जी के चरणौं में अर्पित कर श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें. केवलमात्र सिर्फ एक इसी उपरोक्त उपाय के करने से ही आप देखेंगें कि जहाँ आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है.
         इसके अतिरिक्त यदि आपको व्ययाधिक्य के कारण किन्ही आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड रहा हो, तो उसकी निवृति के लिए घर के पूजनस्थल पर अष्टधातु निर्मित श्री कनकधारा यन्त्र स्थापित करें एवं उस पर लगातार 43 दिन तक नियमित मात्र एक गुलाब का पुष्प अर्पित किया करें. 

भाग्योन्नति हेतु:-

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए सर्वप्रथम शुक्ल पक्ष के बुधवार के दिन सवा 9 रत्ती वजन का गोमूत्री रत्न दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करें अथवा स्वर्ण मंडित एक द्विमुखी रूद्राक्ष गले में धारण करें.
          कम से कम 11 मंगलवार लगातार 2 बून्दी के लड्डू, 5 पान के पत्ते और एक नारियल लेकर रातभर उन्हे अपने सिरहाने रखें और अगले दिन इस सामग्री को किसी नदी/नहर इत्यादि बहते जल में प्रवाहित करें. 
अपने घर या कार्यस्थल की दक्षिण दिशा में सिन्दूर और शहद से भरे दो पात्र सदैव रखें रहें. 
आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध हटकर जीवन में शान्ति एवं समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.

सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए आप प्रति शुक्रवार भूरे/काले अथवा अन्य किन्ही भी दो रंग के सांड को गुड मीठी रोटी खिलायें.
          लगातार एक वर्ष तक प्रतिमास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक नित्य चन्द्रमा को कच्चे दूध में कुशा एवं जल मिलाकर अर्घ्य अर्पित करें. इसके अतिरिक्त पूर्णिमा के दिन गले में चाँदी का एक मोती अवश्य धारण करें. यदि आप विधिपूर्वक उपरोक्त उपाय को सम्पन्न कर सकें तो समझिए कि आप सम्पत्ति,वाहन अथवा सामाजिक व्यवहार एवं य़श-मान सम्बन्धी समस्त समस्यायों से बेहद आसानी से मुक्ति पा सकेंगें. 

सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं कार्यों में व्यवधान अनुभव कर रहे हों, तो इसकी निवृति हेतु आपको अपने घर में केले के दो पौधे लगाकर उनकी नियमित रूप से देखभाल करनी चाहिए एवं परिवार का कोई भी सदस्य संध्या समय उसके समीप शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाया करे.
अपने रसोईघर में पीतल का कोई पात्र अवश्य रखें तथा उसे नियमित रूप से उपयोग में लाया करें. 
साथ ही प्रत्येक बृहस्पतिवार देसी पान के 3 साबुत पत्ते लेकर भगवान शिव को अर्पित करते रहें. 
इस उपरोक्त उपाय से जहाँ एक ओर आपका जीवन सुगम होगा, वहीं आपको यदाकदा जीवन में अनायास उत्पन होने वाली कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज ही मुक्ति मिलने लगेगी.

पारिवारिक कलह मुक्ति एवं दाम्पत्य सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आप प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तिथि तक नित्य केसर + कपूर मिश्रित जल द्वारा रूद्राभिषेक करें.
सफेद रंग के वस्त्र में 125 ग्राम चावल, चाँदी के 4 छोटे चौकोर टुकडे एवं एक मुट्ठी नागकेसर बाँधकर अपने घर की उत्तर दिशा में किसी स्थान पर रख दें. 

चाँदी में मंडवाकर द्वादशमुखी रूद्राक्ष शुक्ल पक्ष के किसी भी शुक्रवार के दिन गले में धारण करें. 

इस बात का विशेष रूप से स्मरण रखें कि उपाय अवधि में अंडा/माँस/शराब आदि किसी भी प्रकार के तामसिक पदार्थ का सेवन पूर्णत: वर्जित है. 

भय, मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु:-

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए 11 बुधवार लगातार एक नारियल नीले वस्त्र में लपेटकर किसी भिखारी को दान करें. 
अपने श्यनकक्ष में ताबें का एक पिरामिड स्थापित करें.
नित्य मानसिक रूप से निम्न मन्त्र का जाप अवश्य किया करें.
मन्त्र:-  ॐ अतिक्रकर महाकाय, कल्पान्त दहनोपम भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमहसि !! 
इस उपरोक्त उपाय से एक ओर जहाँ आपको मानसिक तनाव/भय/दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलने लगेगी, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों की भिन्न-भिन्न विचारधाराओं से मन में उपजने वाली उदासीनता एवं वैमनस्य का भाव भी कदापि जागृत नहीं हो पायेगा.


धनु लग्न और कष्ट निवारक उपाय


जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हर इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके.
यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं. 

आर्थिक समस्या निवारण हेतु:-

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो अथवा पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो, तो इसके लिए सर्वप्रथम शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश जी की चाँदी की एक प्रतिमा, एकादश मुखी रूद्राक्ष और 125 ग्राम पंचमेवा लाल वस्त्र में बाँधकर अपने घर अथवा कार्यस्थल की अल्मारी/तिजोरी में रखें. तत्पश्चात एक वर्ष तक नियमपूर्वक प्रत्येक पूर्णिमा के दिन " ॐ पूषन तवव्रते भयं नरिष्येम कदाचन स्तोतारस्त इहम्भसि !! ॐ पूष्णे नम: " मन्त्र के जाप पश्चात गाय का कच्चा दूध किसी निर्धन व्यक्ति को अवश्य दान किया करें.

केवलमात्र सिर्फ एक इसी उपरोक्त उपाय के करने से ही आप देखेंगें कि जहाँ आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है. इसके अतिरिक्त यदि आपको व्ययाधिक्य के कारण किन्ही आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड रहा हो, तो उसकी निवृति के लिए घर के पूजनस्थल पर चाँदी में निर्मित श्री यन्त्र स्थापित करें एवं उस पर लगातार 43 दिन तक नियमित मात्र एक गुलाब का पुष्प अर्पित किया करें.

भाग्योन्नति हेतु:-

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए सर्वप्रथम शुक्ल पक्ष के रविवार के दिन सवा 5 रत्ती वजन का माणिक्य रत्न दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली में धारण करें( जन्मकुंडली में सूर्य के नीच राशि में होने की स्थिति में नहीं) अथवा स्वर्ण मंडित एक तेरह मुखी रूद्राक्ष गले में धारण करें.शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को एक श्वेत रंग का रेशमी ध्वज बनाकर उसे पीपल के वृक्ष पर बाँध दें, तत्पश्चात प्रति सोमवार ॐ गं गणपतये नम: मन्त्रोचार सहित उस वृक्ष पर कर्पूर मिश्रित जल चढाकर उसकी 5 परिक्रमा किया करें.
आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध हटकर जीवन में शान्ति एवं समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.

सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए आप नित्य प्रात: गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर शंकर जी का अभिषेक करें और न्यूनतम 12 मंगलवार लगातार संध्या समय श्री हनुमान जी को मीठे पान का भोग लगायें. साथ ही शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को एक द्वादशमुखी रूद्राक्ष गले अथवा दाहिनी भुजा में अवश्य धारण करें.यदि आप विधिपूर्वक उपरोक्त उपाय को सम्पन्न कर सकें तो समझिए कि आप सम्पत्ति,वाहन अथवा सामाजिक व्यवहार एवं य़श-मान सम्बन्धी समस्त समस्यायों से बेहद आसानी से मुक्ति पा सकेंगें.

सुरूचिपूर्ण जीवन हेतु:-

यदि आप जीवन में बार-बार परेशानी एवं कार्यों में व्यवधान अनुभव कर रहे हों, तो इसकी निवृति हेतु आपको कम से कम ग्यारह शुक्रवार लगातार गन्ने के रस द्वारा रूद्राभिषेक करना चाहिए.
संभव हो तो मद्य-माँस इत्यादि दुर्व्यसनों से पूर्णत: दूर रहें एवं नित्य प्रात: अपने पितरों के निमित्त पितर गायत्री का जाप अवश्य किया करें. 
इससे जहाँ एक ओर आपका जीवन सुगम होगा, वहीं आपको जीवन में अनायास उत्पन हो रही कईं प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज ही मुक्ति मिलने लगेगी.

पारिवारिक कलह मुक्ति एवं दाम्पत्य सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आपको नियमित रूप से मन्दिर/गुरूद्वारा इत्यादि किसी धार्मिक स्थल पर अवश्य जाना चाहिए. यदि संभव हो तो संयुक्त परिवार में ही निवास करें. इसके अतिरिक्त लगातार 21 बुधवार लाल वस्त्र में एक जटायुक्त नारियल बाँधकर भगवती दुर्गा के मन्दिर में अर्पित करें एवं एक बार किसी धार्मिक स्थल पर अपने हाथों केले का पौधा रौपें.

इस बात का विशेष रूप से स्मरण रखें कि उपाय अवधि में अंडा/माँस/शराब आदि किसी भी प्रकार के तामसिक पदार्थ का सेवन पूर्णत: वर्जित है.

भय, मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु:-

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए 7 शनिवार लगातार सुबह के समय एक काले रंग का छोटा सा गोलाकार पत्थर लेकर उसे अपने सिर से बायें से दायें की ओर घुमाकर तिलों के तेल में डुबोकर रख दें. तत्पश्चात संध्या समय उसे पीपल अथवा बरगद आदि किसी वृक्ष के नीचे रख आयें.

इससे एक ओर जहाँ आपको मानसिक तनाव/भय/दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलने लगेगी, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों की भिन्न-भिन्न विचारधाराओं से मन में उपजने वाली उदासीनता एवं वैमनस्य का भाव भी जागृत नहीं हो पायेगा.

Tuesday, 23 June 2015

वृश्चिक लग्न और कष्ट निवारक उपाय


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जीवन में भरपूर सुख और सफलता की प्राप्ति हर मनुष्य का एक सपना होता है। लेकिन सुख-दुख, गम-खुशी, अमीरी-गरीबी तथा रोग एवं स्वास्थ्य आदि कालचक्र के ऎसे धुरे हैं, जो जीवन के चलने के साथ-साथ ही चलते हैं. दुनिया में हरेक इन्सान किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है , जिनमें से एक होती है--व्यक्ति सम्बंधी समस्या जैसे अपने बारे में/अपनी पत्नि/संतान के बारे में,संतान होने या न होने इत्यादि के बारे में, दूसरी स्थान सम्बंधी मसलन किसी स्थान विशेष जैसे जमीन, जायदाद, मकान, व्यवसाय, नौकरी आदि की समस्या और तीसरी धातु अर्थात धन सम्बंधी समस्या. जीवन में आने वाली इन समस्यायों हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने तरीके से उपाय भी करता है, जिससे कि जीवन को सुखपूर्वक भोगा जा सके. यहाँ हम आपको आपके जन्म लग्नानुसार कुछ ऎसे ही उपायों की जानकारी दे रहे हैं, जिससे कि आप भी अपनी विभिन्न समस्यायों से सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से निजात पा सकते हैं. 


आर्थिक समस्या निवारण हेतु:-

यदि आप आजीविका के क्षेत्र में बारबार अवरोध अनुभव कर रहे हैं, कार्यक्षेत्र में अधिकारी वर्ग से सम्बंधों में बिगाड उत्पन्न हो रहा हो अथवा पिता से तनावपूर्व स्थितियों का सामना करना पड रहा हो, तो इसके लिए सर्वप्रथम इस बात को विशेष तौर पर स्मरण रखें कि अपनी अथवा किसी अन्य की गलतियों और परेशानियों का अधिक बखान न करें अन्यथा आपको जीवन में बारबार आर्थिक समस्यायों का सामना करना पडता ही रहेगा और आप लाख प्रयत्न करने के पश्चात भी कभी पूर्णत: इस कष्ट से मुक्त नहीं हो पायेंगें.

अपनी आजीविका क्षेत्र में उत्पन अवरोध को समाप्त करने हेतु आप नियमित रूप से 16 बुधवार लगातार पान के पत्ते में 1 कौडी, 2 लौंग और चुटकी भर सिन्दूर लपेटकर दोपहर पश्चात किसी नदी/नहर/समुद्र आदि में विसर्जित करें. नित्य संध्या समय श्री बटुक भैरव स्त्रोत्र का पाठ अवश्य किया करें.

यदि आर्थिक परेशानी का सामना करना पड रहा है, बारबार धनहानि हो रही है, व्ययाधिक्य से परेशान हैं अथवा आप ऋण की समस्या से पीडित हैं तो उसकी निवृति के लिए काले पत्थर की दो वृषभ ( शिव वाहन नन्दी) प्रतिमा खरीदकर एक को भवन की ईशान दिशा में और दूसरी प्रतिमा घर के मुख्य प्रवेशद्वार के बाहरी ओर स्थापित करें. प्रत्येक बृहस्पतिवार (न्यूनतम 12 सप्ताह अवश्य) किसी वृषभ को गुड खिलाया करें एवं नित्य प्रात: पूर्वाभिमुख हो ॐ श्रीवत्सलाय वत्सराजाय नम: मन्त्र का जप किया करें.
अपने जीवन कल्याणार्थ आपको छ:मुखी रूद्राक्ष धारण करना भी उत्तम फलदायक सिद्ध होगा. पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक उपरोक्त उपाय को करें तो आप देखेंगें कि जहाँ आपकी आमदनी के स्त्रोत खुलने लगे हैं, वहीं पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों में भी मधुरता की अभिवृद्धि होने लगी है.


सम्पत्ति, वाहन सुख प्राप्ति हेतु:-

यदि आप जमीन-जायदाद, नजदीकी सगे सम्बन्धियों, बन्धु-बांधवों से आपसी सम्बन्धों को लेकर अथवा वाहन सम्बंधी किसी प्रकार की कोई समस्या/कष्ट का सामना कर रहे हैं, तो इसके लिए सर्वप्रथम शुक्ल पक्ष के किसी भी शनिवार के दिन अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर अपनी कनिष्ठका अंगुली के बराबर साईज की चाँदी की एक-एक कील ठोक दें. तत्पश्चात सर्वप्रथम चाँदी में मंडवाकर गले में एक द्वादशमुखी रूद्राक्ष धारण करें एवं प्रत्येक मंगलवार किसी भिखारी को यथासामर्थ्य काले तिल और चावल का दान अवश्य करते रहें. इस उपाय को यदि आप नियमित रूप से श्रद्धा एवं विश्वास पूर्वक कम से कम छ माह की अवधि तक कर सकें तो आपको अपनी इन उपरोक्त सभी समस्यायों का समाधान अपने सामने दिखाई देने लगेगा.

भाग्योन्नति हेतु:-

यदि आपको भाग्योन्नति में बार-बार अवरोध कि स्थितियों का सामना करना पड रहा है, अथवा आपका प्रत्येक कार्य सफलता के समीप आकर रूक जाता हो, तो उसके लिए सर्वप्रथम किसी गुरू से दीक्षा ग्रहण करें अथवा एक बार गंगास्नान कर के आयें, तत्पश्चात शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को स्वर्ण निर्मित एक ध्वज गले में धारण करें एवं प्रत्येक शनिवार निम्न मन्त्र का 12 बार उच्चारण करते हुए लोहे के किसी पात्र में तिल का तेल भरकर और उसमें अपनी छाया देखकर भड्डरी को दान करते रहें अथवा पीपलवृक्ष के नीचे रख आयें.

ॐ तिलैस्तु निर्मितं तेलं गुह्यन्धकार निवारणम !
सर्वपाप विनिर्मुक्तं तैलं दानेन केशव !!

आप देखेंगें कि शनै: शनै: आपके भाग्य के समस्त अवरोध हटकर जीवन में शान्ति एवं समृद्धि का समावेश होने लगा हैं.

शारीरिक एवं मानसिक कष्ट निवारणार्थ हेतु:-

यदि आप किसी भी प्रकार की शारीरिक अथवा मानसिक आधि-व्याधी से परेशान हैं, रोग-बीमारी पर अधिक धन खर्च हो रहा है अथवा शत्रु पक्ष की प्रबलता बनी रहती है, तो आपको अपने जीवन कल्याणार्थ नित्य प्रति निम्न मन्त्र का जप अवश्य करना चाहिए.

ॐ शरणागतदीनार्त परित्राणपरायणे
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोस्तुते ॐ !!


ताबें के किसी पात्र द्वारा जल में रक्त चन्दन, सफेद तिल, जटामाँसी और शहद मिश्रित कर नित्य प्रति भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देते रहें एवं एक पंचमुखी और एक दशमुखी रूद्राक्ष एक साथ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन गले में धारण करें. 
 
इस उपाय से जहाँ एक ओर आप शारीरिक एवं मानसिक रोग-व्याधि एवं शत्रु पीडा से निजात पा सकेंगें, वहीं आपको जीवन में यदाकदा अनायास उत्पन होने वाली कईं अन्य प्रकार की परेशानियों एवं बाधाओं से भी सहज ही मुक्ति मिलने लगेगी.

दाम्पत्य सुख हेतु:-

यदि आप दाम्पत्य जीवन में व्यवधान यथा पति-पत्नि में विवाद, वैचारिक मतभेद, अशान्ती जन्य किन्ही कष्टों का सामना कर रहे हैं तो उसकी निवृति एवं आपसी सामंजस्य की अभिवृद्धि हेतु आपको सर्वप्रथम किसी मन्दिर में कांसे के पात्र का दान करना चाहिए. नित्य संध्या समय घर के पूजास्थल पर गौघृत का एक दीपक अवश्य जलाना चाहिए. अपने घर के उत्तर-पश्चिम कोण में किसी सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में 2 चाँदी के सिक्के, 2 सुच्चे मोती (White Pearl) एवं 1 द्वादशमुखी रूद्राक्ष डालकर हमेशा के लिए रख छोडें. 

भय, मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु:-

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीडित हैं, अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए सर्वप्रथम एक बात का ध्यान रखें कि अपने घर के पूजास्थल को कदापि परिवर्तित न करें. भवन की छत पर पक्षियों के लिए पानी पीने का पात्र रखें एवं कम से कम 12 बुधवार किसी मिट्टी के पात्र में मूँग भरकर मन्दिर में अर्पित करें. साथ ही अपने जीवन कल्याणार्थ नित्य प्रात: ॐ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ! भयभ्यस्त्राहि नो दुर्गा देवि नमोस्तु ते !! मन्त्र का जप अवश्य किया करें.